रवि

"साहित्यिक यात्रा..."

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बेवजह

"कुछ ज़ख्म ऐसे ही, बस राह चलते मिल जाते हैं, बिना किसी खता के ही, दामन से लिपट जाते हैं। इंसान उलझ जाता है अक्सर, उम्र भर इस पहेली में, कि वो कौन से गु"

चंचल मन

"कभी इधर तो कभी उधर, ये हवा सा उड़ता जाए, एक पल में ये ज़मीन, तो दूजे पल आसमां छू आए। तितली के पर लगाकर, हर फूल पे बैठना चाहे, इस चंचल से मन की यारो, क"

अधूरी अभिलाषा

"नयनों में स्वप्न की रचना कोई अधूरी रह गई, हमारे मध्य की वह अनकही दूरी रह गई। घटाएँ प्रेम की घिर कर गगन में छा गई थीं पर, नृत्य करने से वंचित आज एक मयू"

प्रेम

"प्रेम वह दीप है जो अंधकार से संघर्ष नहीं करता, बस जलता है— और अंधकार स्वयं ही पराजित होकर मिट जाता है। प्रेम वह निर्मल सरिता है जो अहंकार के कठोर पर्व"

हमारी भावनाएं

"इन नोटिफिकेशन्स के शोर में, मेरी सबसे ख़ास रिंगटोन हो तुम, इस वाई-फ़ाई वाली दुनिया में, मेरे दिल का कनेक्शन हो तुम। अब ख़त नहीं आते उड़ते हुए, ना कोई "

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