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काव्य कुंज

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विधा तारीख

हमारी भावनाएं

इन नोटिफिकेशन्स के शोर में, मेरी सबसे ख़ास रिंगटोन हो तुम, इस वाई-फ़ाई वाली दुनिया में, मेरे दिल का कनेक्शन हो तुम। अब ख़त नहीं आते उड़ते हुए, ना कोई संदेशा आता है, बस तुम्हारे 'Online' दिखने भर से, इस दिल को चैन आ जाता है। ऑफ़िस की इस भागदौड़ में, जब डेडलाइन सताती है, तुम्हारी भेजी वो एक स्माइली, दिन भर की थकान मिटाती है। शाम के ट्रैफिक जाम में, जब वक़्त ठहर सा जाता है, इयरफ़ोन पर तुम्हारी आवाज़ सुनकर, ये मन सुकून पा जाता है। वो कैफ़े की कड़वी कॉफ़ी भी, तुम्हारी बातों से मीठी लगती है, मैसेज पर ब्लू टिक के इंतज़ार में, मेरी हर धड़कन जगती है। शायद हम न मिल पाएं रोज़, इस तेज़ रफ़्तार भागदौड़ में, पर मीलों दूर होकर भी बंधे हैं हम, इस वीडियो कॉल वाले प्यार में। इंस्टाग्राम की रील्स से लेकर, नेटफ्लिक्स की रातों तक, मेरी हर एक कहानी बसती है, सिर्फ तुम्हारी बातों तक। मशीनी इस ज़माने में, तुम मेरा सबसे प्यारा ख़्वाब हो, मेरी उलझी हुई सी ज़िंदगी का, तुम इकलौता जवाब हो।

कलमकार

रवि

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