Janhavi Modanwal

"साहित्यिक यात्रा..."

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प्रकाशित रचना

तयशुदा

""सब तय है पहले से, की किस रास्ते पर चलना है, और कहाँ रुकना है। हम तो बस किरदार हैं इस रंगमंच के, पटकथा तो पहले ही लिखी जा चुकी है। पर क्या इस तयशुदा स"

शिवतत्व: सादगी, समर्पण और सर्वस्व

"शिवजी केवल प्रेम के प्रतीक नहीं हैं। शिवजी दानी, सरल जीवन यापन और समर्पण की पराकाष्ठा हैं। वे जहाँ एक ओर संहारक हैं, वहीं दूसरी ओर परमकल्याणकारी भी है"

मनुष्य एक समंदर

""अदृश्य है मनुष्य जीवन में, मनुष्य को गहराई से समझना, जैसे समंदर में उतरकर, कोई मोती चुनना। भावनाएं अदृश्य हैं, अदृश्य है ये दर्द, मनुष्य के भीतर छुपा"

दोष किसका?

""दूसरों की कमियाँ बताना आसान है, लेकिन खुद की कमियों को जानकर उन्हें सुधारना मुश्किल है।""

हालात कुछ भी हों, खिलना मत भूलो

""कमल का कीचड़ में जन्म लेना उसकी नियति हो सकती है, लेकिन उसका खिलना उसकी अपनी विशेषता है। महानता इस बात में नहीं कि आप कहाँ से हैं, बल्कि इसमें है कि "

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