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शिवतत्व: सादगी, समर्पण और सर्वस्व
रचनाकार की आवाज में:
शिवजी केवल प्रेम के प्रतीक नहीं हैं। शिवजी दानी, सरल जीवन यापन और समर्पण की पराकाष्ठा हैं।
वे जहाँ एक ओर संहारक हैं, वहीं दूसरी ओर परमकल्याणकारी भी हैं।
उनका वैराग्य हमें सिखाता है कि सांसारिक वैभव के बिना भी भीतर से पूर्ण कैसे रहा जाता है, और उनका विषपान यह दर्शाता है कि जगत की रक्षा के लिए खुद को कैसे खपा दिया जाता है।
आज के उपभोक्तावादी युग में, जहाँ इंसान भौतिक सुखों के पीछे भाग रहा है,
शिव का यह सरल और त्याग्मय जीवन दर्शन हमें वास्तविक शांति और संतुष्टि की राह दिखता हैं।
आप सभी को सावन माह की हार्दिक शुभकामनाएं।
कलमकार