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मनुष्य एक समंदर
रचनाकार की आवाज में:
"अदृश्य है मनुष्य जीवन में,
मनुष्य को गहराई से समझना,
जैसे समंदर में उतरकर, कोई मोती चुनना।
भावनाएं अदृश्य हैं, अदृश्य है ये दर्द,
मनुष्य के भीतर छुपा, जैसे एक मौसम है सर्द।"
कलमकार