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रचनाकार की आवाज में सुनें:
"सब तय है पहले से, की किस रास्ते पर चलना है, और कहाँ रुकना है।
हम तो बस किरदार हैं इस रंगमंच के, पटकथा तो पहले ही लिखी जा चुकी है।
पर क्या इस तयशुदा सफ़र में,
मुस्कुराना और संभलना भी हमारे हाथ नहीं?"
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कलमकार