"साहित्यिक यात्रा..."
"बदलते मौसम की दस्तक जो पड़ती है कानों में कभी कविता में, छंदों में, कहीं सुरीले गानों में ये हवाओं की महसूस होती बदलती खुशबुएं तो कभी दिखते हैं फूलों "
"प्रकृति का प्रतिशोध जिसकी गोद में कल तक खेले, सांस लिए और बड़े हुए आज हम क्यों उसी प्रकृति को गंदा करने पर हैं अड़े हुए देखो ऐसा हरगिज़ न हो आ जाए उसक"