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बदलते मौसम की दस्तक
रचनाकार की आवाज में:
बदलते मौसम की दस्तक जो पड़ती है कानों में
कभी कविता में, छंदों में, कहीं सुरीले गानों में
ये हवाओं की महसूस होती बदलती खुशबुएं
तो कभी दिखते हैं फूलों के रंग भी बदले से
हमारे आस-पास के सारे मंज़र भी देख लो
अब जो ये सभी फिर कहां रहते हैं पहले से
हर मंज़र है जवां-जवां छाई एक उमंग है
फिर लहरा के उड़ती है दिल की जो पतंग है।
अनमोल सिन्हा 'अनमोल'
कलमकार