"साहित्यिक यात्रा..."
"ममता की मूरत,प्रेम का सागर है माँ। सब कुछ धारण करे,ऐसी गागर है माँ। घर घर में रोशन करे,नव सबेरा है माँ। प्रेम से बसने वाली,घर का बसेरा है माँ। प्रेम,त"
"हज़ारों ज़िम्मेदारियाँ, हज़ारों लक्ष्य मेरे हाथ है। मैं शिक्षक हूँ, विधाता का अनूठा मेरा ठाठ है। कभी क्लर्क, कभी कलीग, कभी मैं हेडमास्टर हूँ। इन नौनिहालो"
"*बाबा साहब तेरा नाम रहेगा* जब तक यह संविधान रहेगा, बाबा साहेब का नाम रहेगा। समता, न्याय, स्वतंत्रता का, हर दिल में सम्मान रहेगा।। डॉ.भीमराव ने शिक्षा "