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काव्य कुंज

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विधा तारीख

मैं युग का अवतार हूँ

हज़ारों ज़िम्मेदारियाँ, हज़ारों लक्ष्य मेरे हाथ है। मैं शिक्षक हूँ, विधाता का अनूठा मेरा ठाठ है। कभी क्लर्क, कभी कलीग, कभी मैं हेडमास्टर हूँ। इन नौनिहालों के लिए तो, मैं युग का अवतार हूँ। कभी MDM की थाली, कभी SIR का ज्ञान है। हर रजिस्टर के पन्ने पर, मेरा होता इम्तिहान है। जनगणना हो या चुनाव, हर मोर्चे पे तैयार हूँ। मैं शिक्षक हूँ, हर व्यवस्था का ही मूलाधार हूँ। ICT के इस युग में, नई राहें दिशाएँ मैं गढ़ रहा हूँ। निपुण भारत के सपनों को लेकर, आगे मैं बढ़ रहा हूँ। इन मासूम बच्चों की आँखों का, मैं ही तो इकरार हूँ। इन नौनिहालों के लिए तो, मैं युग का अवतार हूँ। भले ही काम के बोझ से, मेरा तन हो रहा चकनाचूर है। मगर इनकी एक मुस्कान से, मिट जाता सारा कसूर है। मैं ज्ञान का एक दीप, और कर्म की तलवार हूँ। मैं शिक्षक हूँ, हर व्यवस्था का ही मूलाधार हूँ। *सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"* ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) पिन- 493558 मोब.- 8103535652 ईमेल- sldmadhur13@gmail.com

कलमकार

सुंदरलाल डड़सेना 'मधुर'

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