नानदाऊ पटेल

"साहित्यिक यात्रा..."

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प्रकाशित रचना

नवरात्रि

"किया नवरात मे, नवरूप मे,श्रृंगार माता ने अवतरित होके धरती पर, किया उपकार माता ने करके अंत महिसासुर का,शक्ति स्वरूपा ने किया था अंतआतंक का,दुर्गा अवतार"

सूरज आग उगल रहा है

"सूरज आग उगल रहा है पसीने से बदन जल रहा है समीर विश्राम कर रहा है अब तो सिर्फ हवा चल रहा है"

ऋतुराज बसंत

""ऋतुराज के स्वागत बर" रुख राई के जूनहा पाना सूखा होके गे हे झर नवा नवा सुघर सुघर कोमल पान ओढ़ के हरिहर रुख नवा श्रृंगार करें हे ऋतुराज के स्वागत बर... "

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