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काव्य कुंज

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विधा तारीख

ऋतुराज बसंत

"ऋतुराज के स्वागत बर" रुख राई के जूनहा पाना सूखा होके गे हे झर नवा नवा सुघर सुघर कोमल पान ओढ़ के हरिहर रुख नवा श्रृंगार करें हे ऋतुराज के स्वागत बर... परसा रुख म डाली-डाली बरत अंगरा अस लाली- लाली परसा फूल ह गे हे बर ऋतुराज के स्वागत बर.. अमट अमली तेंदु चार आमा बोरई जाबो यार स्वाद के राजा, फर के राजा मौरे आमा गे हे फर ऋतुराज के स्वागत बर.... स्वरचित Nd patel

कलमकार

नानदाऊ पटेल

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