यशु तलवारे

"साहित्यिक यात्रा..."

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ग्रीष्म का ताप नृत्य

"तपिश की लपटें, आकाश लालिमान, सूरज की किरणें, पृथ्वी को जलाएँ। पात पीले झरें, धरती सूखी सिसके, वायु उष्ण चले, हृदय जलते रहें। कोयल की कूक, उदास हो रही,"

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