"साहित्यिक यात्रा..."
"समय का पहिया चलता है। नित्य जीवन भी ढलता है।। चलें बंदे हित करने को। दीन जग के दुख हरने को।। समय पर सतर्क हो जाए।। नहीं तो पश्तावा ही पाए। कहे गुजरे फ"
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