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विधा
तारीख
समय का पहिया
रचनाकार की आवाज में:
समय का पहिया चलता है।
नित्य जीवन भी ढलता है।।
चलें बंदे हित करने को।
दीन जग के दुख हरने को।।
समय पर सतर्क हो जाए।।
नहीं तो पश्तावा ही पाए।
कहे गुजरे फिर ना आए।
समय रण से बस में लाए।।
चमक सूरज बन जन प्यारे।
कर्म योगी जग संवारे ।।
हृदय तम तजकर बढ़ना है।
पलों को सुंदर गढ़ना है।।
कलमकार