परमानंद निषाद 'प्रिय'

"साहित्यिक यात्रा..."

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प्रकाशित रचना

माँ की ममता (दोहा छंद)

"माँ की ममता दिव्य है, माँ से है पहचान। माँ की कृपा-कटाक्ष से,बनता पुत्र महान।।1।। ममता के ऑंचल तले, मिलती ठंडी छाँव। जब तक माँ का साथ है, नहीं जलेगा प"

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