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माँ की ममता (दोहा छंद)
रचनाकार की आवाज में:
माँ की ममता दिव्य है, माँ से है पहचान।
माँ की कृपा-कटाक्ष से,बनता पुत्र महान।।1।।
ममता के ऑंचल तले, मिलती ठंडी छाँव।
जब तक माँ का साथ है, नहीं जलेगा पाँव।।2।।
धरती की भगवान है, माँ का रूप अनूप।
मातृ-चरण में स्वर्ग है, देवी का प्रतिरूप।।3।।
माता का दर्शन करें,अंतस रहे पवित्र।
माँ सबको अच्छी लगे,मातु हमारी मित्र।।4।।
माता से हमको मिला,एक सुखद संसार।
माता के मुस्कान से, संकट जाते हार।।5।।
माँ की इच्छा शांत हो, तब समझो वैराग्य।
माँ के आशीर्वाद से,बनता है सौभाग्य।।6।।
देती सुखमय जिंदगी, सहती कष्ट अपार।
धरती से आकाश तक, माता सुख का सार।।7।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
कलमकार