"साहित्यिक यात्रा..."
"ना जाने क्यों पवन ने लिया रुख बदल, ना जाने क्यों शीत लहर गई कुछ संभल, कुछ पीत पुष्प चुपके-चुपके डालों से झरने लगे, और हवा में महुए की मधुर महक भरने लग"
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