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काव्य कुंज

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विधा तारीख

नवल विहान

कालचक्र ने बदली करवट, समय ने पन्ना पलटा है, देखो क्षितिज पर नवल सूर्य का, स्वर्ण रथ आ पहुंचा है। बीती यादें, बीती बातें, सब धुंधला इतिहास हुआ, जो शेष बचा है मुट्ठी में, बस वही तुम्हारा खास हुआ। केवल तारीखें बदलना ही, नव वर्ष नहीं कहलाता है, यह पर्व स्वयं से स्वयं के, परिचय का दीप जलाता है। इस बरस न मांगो सुख केवल, तुम मांगो संघर्षों की धार, तूफानों से जो टकराए, ऐसी हिम्मत का पतवार । मिट्टी को सोना कर दे जो, उस पौरुष का आह्वान करो, बैठो मत केवल आस लिए, उठो ! नूतन निर्माण करो। अवसाद, निराशा, भय त्यागो, उल्लास नया विस्तार करे, यह नव वर्ष आपके जीवन में, हर स्वप्न को साकार करे।

कलमकार

खिरसिन्धु साहू

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