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काव्य कुंज

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ईश्वर का त्याग कर जो ऐश्वर्य का मोह करते, सुनिश्चित पतन की राह पर ही वे चलते हैं। धन की झिलमिल में जो सत्य को भूल जाते, क्षणभंगुर सुखों में जीवन गंवाते हैं । सोने के महल भी तब सूने लगते हैं, जब मन के अँधेरों में वे खो जाते हैं। भक्ति की ज्योति जिनकी बुझ गई माया के जाल में वे सदा ही फंसते हैं । जिसने ईश्वर को हृदय में बसाया, उसने जीवन का सार पाया। धन-वैभव नहीं , शांति हो चाह दया और करुणा ही हैं बैकुंड की राह। मोह-माया से ऊपर उठ कर धर्म-पथ पर निरंतर चलकर, अमरत्व की और कदम बढ़ाते हैं । जो ईश्वर का त्याग कर ऐश्वर्य का मोह करते, सुनिश्चित पतन की राह पर वे चलते हैं।
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