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स्मृतियों का स्पर्श
रचनाकार की आवाज में:
***स्मृतियों का स्पर्श
यादों का बसेरा होती है स्मृतियां में,
जहां बचपन की खनक होती है ।
छोटी-छोटी यादों से,सजा हुआ होता ,
पुनः जीवंत सा लगता स्मृतियों का स्पर्श ।
मां का वह अपने हाथों से सजाई थाली,
खाते पेट भर हो जाते मदमस्त मतवाले ।
दादा - दादी का वह ,लाड प्यार,
मधुर स्मृतियों में बसा संसार।
हमारे जीवन का वह सुनहरा पल,हमे बहुत भाता है।
जब जब मधुर स्मृतियां हृदय में छा जाता है।
हृदय के कोने कोने में छिपे स्मृतियों मन को भाते ,
रह गई बस यादें, जो मन को बड़ा लुभाते।
स्वरचित रचना
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
जिला महासमुन्द
कलमकार