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कुछ सुकून के पल
रचनाकार की आवाज में:
दौड़ती भागती जिंदगी से,
कुछ पल का आराम चाहिए।
जीवन चलता यूं ही अनवरत,
हमें एक ऐसी शाम चाहिए।
जीवन में हो एक पहचान,
ऐसा भी कुछ काम चाहिए।
दौड़ती भागती जिंदगी में हमें भी ,
एक सुकून भरी शाम चाहिए।
थक हार कर जब हम भी लौटे घर को,
सुकून भरा पल भर का आराम चाहिए।
चाय की चुस्की और हो गरम पकौड़ी,
ऐसी एक सुनहरी शाम चाहिए।
हमें भी पल भर का आराम चाहिए।
एक ऐसी सुनहरी सुकून से भरी शाम चाहिए।
*स्वरचित मौलिक
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली**
कलमकार