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मां
रचनाकार की आवाज में:
*माँ तुमने ही यह मान दिलाया*
सुंदर दुनिया का दरश दिखाया
बेटी बनाकर इस दुनिया में लाई
इस सुंदर सृष्टि को रचने का
मुझको भी हकदार बनाया
*माँ बस एक बार आ जाओ*
मुझे अपने सीने से लगा जाओ
वो स्नेहभरी गोदी मुझे रुलाती है
दुधइन खुशबू से भरा वो आँचल
सिर पर फिर से मेरे लहरा जाओ
*माँ तुमसे कुछ कहना है*
सुकोमल मुझे ना रहना है
जीवन की राहें पथरीली
बन हिरणी मैं भरूँ कुलांचे
अपने सम्मान के खातिर
रण चंडी बन रक्त बीज संहारूँ
*माँ तुम हो कहाँ*
एक बार तो आओ यहाँ
साँसों के आने जाने में
हृदय के हर स्पंदन
तुम ही तुम तो बसती हो
माँ तुम हो कहाँ?
*माँ तुम्हें याद आती है मेरी*
तुमसे ही जुड़ी हैं साँसें मेरी
पोषण का प्रथम निवाला
तुमसे ही तो पाया मैंने
तुम ही मेरी प्रथम गुरु हो
जीवन दायिनी माँ जननी हो
माँ तुम्हें याद आती है मेरी?
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वर्षा जैन"प्रखर"
दुर्ग(छत्तीसगढ़)
कलमकार