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झरोखों में छिपा प्रेम
रचनाकार की आवाज में:
झरोखों में छिपा प्रेम,
कब दिल में उतर जाता है,
खामोश नज़रों से कब ,
रिश्ता गहरा बन जाता है।
अनजाना सा कोई चेहरा,
अपनापन दे जाता है,
बेखबर दिल भी कब ,
उसका दीवाना बन जाता है।
हवा के संग आई बातें,
मन को छू जाती हैं,
बिन बोले ही ,
कई दास्ताँ कह जाती हैं।
जो कल तक था बेगाना,
आज अपना लगने लगता है,
ये प्रेम है जनाब,
जो चुपके से दिल में बस जाता है।
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
कलमकार