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रचनाकार की आवाज में सुनें:
बदलते मौसम की दस्तक।
बदलते मौसम की दस्तक,सुन लो प्यारे आज,
नई उमंगें साथ में लाया, गाता प्रकृति साज।
ठंडी-ठंडी चली हवाएँ, महके फूलों का राज,
सूखी डाली पर भी देखो, खिलता नव अंदाज़।
पत्तों की सरसर में जैसे, बजता मीठा साज,
बदलते मौसम की दस्तक, सुन लो प्यारे आज।
कभी धूप सुनहरी आए, कभी घटा का ताज,
नीले गगन में उड़ते पंछी, गाएँ मधुर सुर-राज।
धरती ओढ़े हरियाली का, सुंदर नया लिबास,
बदलते मौसम की दस्तक, सुन लो प्यारे आज।
नया सवेरा आशा लाए, खुशियों का आगाज़,
जीवन में भर दे यह मौसम, सपनों का अंदाज़।
मन के सारे फूल खिलें अब, मिट जाए हर साज़,
बदलते मौसम की दस्तक, सुन लो प्यारे आज।
✍️ अनिल जाॅंगड़े
भैसबोड़ बिल्हा बिलासपुर
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कलमकार