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मुश्किल सही, नामुमकिन तो न होगा।
रचनाकार की आवाज में:
थक कर न बैठ ऐ मुसाफिर, अभी राहें बाकी हैं,
हौसलों की तरकश में, अभी कुछ आहें बाकी हैं।
माना कि अंधेरा घना है, और कांटों भरा रास्ता,
पर तेरे जुनून से ही, तेरी जीत का वास्ता।
मिलेगा वो सब कुछ, जो तुमने चाहा होगा,
सफर मुश्किल सही, पर नामुमकिन तो न होगा ।
ये लहरें डराती हैं, किश्ती को डुबाने के लिए,
ये आंधियाँ चलती हैं, तेरे हिम्मत परखने के लिए।
पर तू अपनी जिद्द की पतवार को थामे रख,
नजरें ऊँची और खुद पर पूरा यकीन रखे रख।
तूफानों का रुख मोड़ दे, तू वो शख़्सियत है,
तेरी मेहनत ही तेरी सबसे बड़ी वसीयत है।
पर्वत शिखर से कह दो, हम आने वाले हैं,
पाँवों के छालों से, हम राह सजाने वाले हैं।
गिरेगा तू सौ बार, पर उठना ही तेरी फितरत हो,
दुनिया देखे तुझे ऐसे, कि तू सबकी हसरत हो।
मिलेगा वो सब कुछ, जो तुमने चाहा होगा,
सफर मुश्किल सही, पर नामुमकिन तो न होगा।
धैर्य की डोर न टूटे, चाहे वक्त ले इम्तिहान,
हर हार के पीछे छिपा है, सफलता का वरदान।
आज जो तंज कसते हैं, कल वो तालियाँ बजाएंगे,
तेरी खामोश कोशिशों के, सब किस्से सुनाएंगे।
उठ, कमर कस, और चल पड़ अपनी मंजिल की ओर,
रात जितनी काली होगी, उतनी ही सुनहरी होगी भोर।
कलमकार