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हार से सीख
रचनाकार की आवाज में:
पथ में गिरना हार नहीं, गिरकर रुक जाना हार है,
यह तो बस मंज़िल की, एक छोटी सी दीवार है।
हारता है हर मुसाफ़िर, कभी न कभी इस राह में,
जीतता वही है, जो आग रखता है अपनी चाह में।
जो जख्म मिले हैं हार से, उन्हें मरहम तुम बना लो,
जो गलतियाँ की थीं, उन्हें आज का सबक बना लो।
मिट्टी में दबकर ही तो, बीज वृक्ष बन पाता है,
जो हार से सीखता है, वही विजेता कहलाता है।
दोनों में केवल एक ही बुनियादी फर्क होता है,
जीतने वाला हार को 'अंत' नहीं,
बल्कि 'सुधार का मौका' समझता है।"
कलमकार