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रिश्ते की पुकार
रचनाकार की आवाज में:
अगर मेरा साथ तुम्हें बोझ लगने लगे,
तो मुझे कहना मगर यूँ चुप रहना मत।
अगर मेरा साथ तुम्हें बीच राह लगने लगे,
तो मेरा हाथ थामे रखना, छोड़ना मत।
मैं धूप में तेरे लिए छाँव बन जाऊँगा,
मेरी वफ़ाओं को कभी तोलना मत।
जो दर्द हो दिल में, मुझे भी बता देना,
आँखों में आँसू यूँ ही घोलना मत।
मैं साथ चलूँगा हर मुश्किल डगर में,
मुझको यूँ हालात से मोड़ना मत।
अगर कभी थक जाओ सफ़र की थकन से,
मेरे कंधों को तुम पराया समझना मत।
मैं नाम तेरे से ही मुकम्मल हूँ जानाँ,
मुझको किसी और से जोड़ना मत।
जो प्यार दिया है, उसे सच्चा ही रखना,
झूठे रिश्तों में मुझे तोड़ना मत।
अगर मेरा साथ तुम्हें कम लगने लगे,
तो और करीब आना, दूर होना मत।
बस इतनी सी इल्तिज़ा है मेरी तुमसे,
मुझे चाहो तो फिर छोड़ना मत।
कलमकार