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काव्य कुंज

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विधा तारीख

पथ का निर्णय

इस पथ चलूँ या उस पथ चलूँ, संशय में हूँ—किस पथ चलूँ। मन है विचलित, बुद्धि भ्रमित, हर मोड़ प्रश्नों से लड़ूं। सत्पथ कठिन सही पर, देता जीवन सार। संघर्षों में तपकर ही, निखरता व्यक्तित्व अपार॥ छल-पथ चमक दिखाता है, सुख का बुनता जाल। क्षणिक आनंद की ओट में, छीन लेता गौरव-ढाल॥ सत्य, श्रम और धैर्य का, जिसने लिया आधार। वही पथ करता अंत में, जीवन को साकार॥ इसलिए मैं वह पथ चुनूँ, जो अंतर्मन में दीप जलाए, कठिन सही, पर सत्य से कभी न मुख मोड़ पाए ॥

कलमकार

खिरसिन्धु साहू

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