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अधूरी अनकही बातें
रचनाकार की आवाज में:
अधूरी अनकही बातें
जिसे कहा ना सकूं किसी से ,वह अनकही याद हो तुम ।
मेरे शब्दों में जो मौन बसता है, उस मौन का सार हो तुम ।
मेरी रातों को नींद और दिल का करार हो तुम।
यादों से मिले गर्माहट ,वह आत्म रूपी ताप हो तुम ।
मेरे अधरों पर रुके हुए ,मेरे हर सवालो का जवाब हो तुम ।
मेरे दिल में उठते, हर एहसास की शुरुआत हो तुम ।
जिसे कहा ना सकूं ,वह अनकही कथा का सार हो तुम।
जिसे कहा न जाए शब्दों में, क्या कहूं ऐसे लाजवाब हो तुम।
जीवन के राहों में जो थामे रहे हाथ,
वह जीवन रूपी डगर का साथ हो तुम।
सब कुछ तुझमें निहित सा ,मेरे जीवन का विस्तार हो तुम ।
वो अनकही कहानियों का ,प्रेम भरा आधार हो तुम।
जिस कहानी को कह न सकूं ,
वह अनकही कहानी का सार हो तुम।
श्रीमती प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
जिला महासमुन्द
कलमकार