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काव्य कुंज

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विधा तारीख

चरित्र की सुगंध

कितने ही चेहरे आए और आँखों से उतर गए, रंग-रूप के वो सारे जलवे, लम्हों में बिखर गए। दिल की गहराइयों में मुकम्मल जगह सिर्फ उन्हें मिली, जिनके उजले किरदार, उनकी सूरत से आगे निकाल गए। सुंदरता का मोह तो हर एक मूरत में समाया था, आकर्षण ने भी नज़रों पर तिलस्मी जाल बिछाया था। हृदय पटल पर लेकिन, अमिट वही लकीर बन सके, जिनके चरित्र का वज़न, उनके चेहरों से कहीं ज्यादा था। जब किरदार की गरिमा चेहरे पर भारी पड़ गई, तभी मोहब्बत रूह की सीढ़ियाँ चढ़ने लग गई। जिसकी सादगी ने सलीके से श्रृंगार किया अपना, उसी एक शख्स को इस दिल ने बार-बार चुना। चेहरा तो वक्त ढलने के साथ ढल जाएगा, बदलता मौसम हर मखमली रंग को निगल जाएगा। पर जो दिल में उतर गए अपने ऊंचे चरित्र के दम पर, उन किरदारों की सुगंध से जीवन महकता रह जाएगा।

कलमकार

खिरसिन्धु साहू

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