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काव्य कुंज

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झिमिर झिमिर गिरत हावे बदरा, चलत हे भर भर नदिया नरवा हो , किसान ,गुरुजी घलो खेत,स्कूल नई जाय सकत हे, कईसन होही लईकन के पढ़ई आऊ खेत खलिहा हो 🌧️🌧️🙏🏻😂😂
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