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बरसा दिन आसीछे
रचनाकार की आवाज में:
बरसा दिन आसिछे, पायन झर-झर बरसूछे,
धरती मां हंसूछे, सागुआ-सागुआ दिखुछे।
सबु आड़े सागुआ-सागुआ दिखुछे।
छुआमाने खेलुछन, छप-छप करी नाचुछन,
किहे भी नेइं सुनबार, मां..जे डाखी मरुछे,
केते टे डाखी मरुछे,
कलिया बादल घेरुछे, चड़का जे केते मारुछे,
गड़-गड़ बजा बागिर बाजुछे, टीके-टीके डर लागुछे।
मते टीके डर लागुछे।
मन जे उसत हउछे, खेलबार-भिझबार चहुछे
बरसा दिन आसिछे, पायन झर-झर बरसूछे ॥
धरती मां.. हंसूछे ।
कलमकार