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रचनाकार की आवाज में सुनें:
ठीक इसी दिन जन्मे थे, इस मिट्टी की दो शान।
एक हमारे प्यारे बापू, दूजे शास्त्री बहादुर लाल,
दोनों ने मिलकर संवारा था, अपने भारत का हाल।
बापू जी ने एक लाठी लेकर दिखाया था कमाल,
बिना लड़े ही अंग्रेजों को, किया था बहुत बेहाल।
सत्य और अहिंसा को ही, अपना अस्त्र बनाया था,
एक धोती और चश्मे में ही, दुनिया पर छाया था।
शास्त्री जी भी बहुत सरल थे, कद में भले ही छोटे थे,
पर संकट में भारत माँ के, वो ही सच्चे बेटे थे।
'जय जवान, जय किसान' का, दिया देश को नारा,
खुशी से झूम उठा था सुन कर, सारा हमारा।
दोनों का जीवन सादा था, दोनों सच्चे हिंदुस्तानी,
देश के खातिर दोनों ने ही, दे दी अपनी क़ुरबानी।
आज के दिन हम सब , दोनों को शीश झुकाते हैं,
बापू और शास्त्री जी के, चरणों में फूल चढ़ाते हैं।
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कलमकार