रचना की खोज जारी है...
विधा
तारीख
जिसकी जैसी नज़र थी
रचनाकार की आवाज में:
अच्छे ने अच्छा कहा मुझे,
बुरे ने बुरा कहा मुझे।
जिसको जितनी ज़रूरत थी,
उतना ही पहचाना मुझे।
किसी ने मुस्कान समझा,
किसी ने ख़ामोशी का नाम दिया।
किसी ने अपना हमसफ़र माना,
किसी ने बेवजह इल्ज़ाम दिया।
मैं तो वही रहा हर मोड़ पर,
बस लोगों के आईने बदलते गए।
जो दिल से मिले, वो अपना बन गए,
जो स्वार्थ से मिले, वो रास्ते बदलते गए।
कलमकार