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काव्य कुंज

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विधा तारीख

दहलीज पर दस्तक

पुरानी रुत ने अपना आंचल अब समेटा है, हवा की लहर ने यादों को फिर से लेटा है। ​बदलती धूप की रंगत बता रही है हमें, कि वक्त ने एक नया रुख यहाँ उकेरा है। ​अजीब प्यास है इन मद्धम सी सर्द रातों में, जैसे कोई पुराना अक्स ठहरी हुई बातों में। ​सफ़र ये मौसम का बस एक सिलसिला ही नहीं, ये रूह की मुलाक़ात है खुद की ही यादों में।

कलमकार

ललित कुमार दास

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