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दहलीज पर दस्तक
रचनाकार की आवाज में:
पुरानी रुत ने अपना आंचल अब समेटा है,
हवा की लहर ने यादों को फिर से लेटा है।
बदलती धूप की रंगत बता रही है हमें,
कि वक्त ने एक नया रुख यहाँ उकेरा है।
अजीब प्यास है इन मद्धम सी सर्द रातों में,
जैसे कोई पुराना अक्स ठहरी हुई बातों में।
सफ़र ये मौसम का बस एक सिलसिला ही नहीं,
ये रूह की मुलाक़ात है खुद की ही यादों में।
कलमकार