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काव्य कुंज

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विधा तारीख

मातारानी की वंदना

गीत तर्ज ये-मन में बसाकर तेरी मूर्ति वंदन करूं अभिनंदन करूं। वंदन करूं, अभिनंदन करूं, मैया मैं तेरे चरण वंदन करूं॥ जब-जब करूं मैया ,मैं साधना, मैया करूं मैं ,तेरी आराधना। तू ही है मेरी &&&&हर एक पूजा, तुझसे ही रोशन हर एक दूजा॥&& वंदन करूं अभिनंदन करूं मैया मैं तेरी चरण वंदन करूं तू ही है दीपक, तू ही है ज्योति, तेरे बिना जीवन की अधूरी प्रीति। जब भी डगमगाऊँ &&राहों में मैया, थाम लेना हाथ बन जाना खेवैया॥ वंदन करूं अभिनंदन करूं मैया मैं तेरी चरण वंदन करूं तेरी ममता की छाया निराली , तू ही है दुनिया में मुझको सबसे मेरी प्यारी। तेरे दर पे जो &&भी सर झुकाए है, खाली झोली जीवन की भरके जाए है॥ वंदन करूं अभिनंदन करूं मैया मैं तेरी चरण वंदन करूं तेरे नाम की &&&महिमा भारी, हर लेती जीवन की पीड़ा तू सारी। दर्शन देकर &&&&कृपा बरसाना, मैया मुझे भी गले से लगाना&&&॥ वंदन करूं, अभिनंदन करूं, मैया मैं तेरे चरण वंदन करूं॥ स्वरचित गीत प्रतिभा दिनेश कर विकासखण्ड सरायपाली

कलमकार

प्रतिभा दिनेश कर

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