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हरेली तिहार
रचनाकार की आवाज में:
आए हे हमर हरेली तिहार।
हरियर-हरियर ओढ़े हे भुइयाँ,
समय म निपटे हे सब खेती-खार।
नांगर, कुदाली अऊ राफाला धोइन,
अन्नदाता मन सब औज़ार ला संजोइन।
धूप-दीप अऊ गुलाल लगाइन,
माई-देवता ला नवात चढ़ाइन।
दुआर-दुआर म नीम के पाना,
सबो बिपत्ति अऊ रोग ला भगाना।
गौ-माता ला लोई खवावयं,
घर-घर म सुख अऊ समृद्धि लावयं।
लइका मन गेड़ी म चढ़के धावय,
गली-खुचरी म उछाह छवावय।
ठेठरी, खुरमी अऊ चीला के गोठ,
हाँसी-खुशी म खिलगे सबो के होंठ।
मेहनत फले हे, हँसत हे किसान,
छत्तीसगढ़ के ऐहा हर ए स्वाभिमान।
नाचयं, गावयं, मनावयं तिहार,
जुड़े रहे अइसने मया अऊ दुलार!
कलमकार