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सुजलाम-सुफलाम
रचनाकार की आवाज में:
अखबारों में तो झांको, रामराज्य छाया है,
महंगाई और बेकारी तो बस केवल माया है।
हर युवा के हाथ में अब नौकरी की बहार है,
चहुं ओर बस तरक्की और खुशहाली का त्यौहार है!
इतनी सुदृढ़ है व्यवस्था, पेपर लीक कहाँ होता है?
टेलीग्राम से सीधे, जो पर्चा बाहर आता है,
उसे 'लीक' नहीं कहते साहब, वो तो
'होम डिलीवरी' कहलाता है!
तिलमिलाते धूप में जो लाइनें लगी हैं भारी,
मजबूरी न समझो इसे, यह है 'स्वास्थ्य-सुधार' की तैयारी।
भर्ती की आस में जो उम्र बीत चुकी है आधी,
वही तो है असली तपस्या, वही है सच्ची समाधि!
डिग्रियां बक्से में रख, पकोड़े तलने का ज्ञान मिला,
बिना परीक्षा दिए ही, आत्मसंयम का वरदान मिला।
घोटालों के शोर में अब, संगीत बड़ा ही भव्य है,
जिसकी जेब में गांधी है, उसका ही 'रामराज्य' है।
ढोल बजाओ, शंख फूंको, कोई सवाल मत उठाना,
अच्छे दिन आ चुके हैं, बस तुम नजरें मत मिलाना!
कलमकार