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काव्य कुंज

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विधा तारीख

प्यासी धरती मां

पहला चरण जोताई प्रारंभ धरती थी प्यासी, गिरी पानी की बूँद, मेघों ने छेड़ा सावन का , मधुर सुर-छंद। हरियाली के लिए जरूरी , यह बरसात का मौसम, खेती के लिए फिर जाग उठा , किसानों का आलम। उठकर चला खेतों में , मेहनती किसान, हल जोतकर बढ़ाया , धरती माँ का मान। लहलहाती फसलों से सजेगा , खेतों में ओढ़े हरियाली की शान, अन्नदाता की मेहनत से , फिर मुस्काएगा हिंदुस्तान। 🌾🌧️🚜🚜🚜 प्रतिभा दिनेश कर विकासखण्ड सरायपाली

कलमकार

प्रतिभा दिनेश कर

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