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काव्य कुंज

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विधा तारीख

भावनाओं का शोर

भर लेती हूं कविताओं में उड़ान , पल भर ही सही मिट जाती है थकान, आंखें बंद करूं तो शब्द अंगड़ाइयां लेते, लेखनी हाथ लेकर उसे हम कागज पर उकेर देते , हृदय की अनंत कामनाओं से बंधी ये डोर , जो करते है शब्दों से अपनी भावनाओं का शोर ।।।। प्रतिभा दिनेश कर

कलमकार

प्रतिभा दिनेश कर

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