Logo

काव्य कुंज

A+
A-
विधा तारीख

शीर्षक

भर लेती हूं कविताओं में उड़ान , पल भर ही सही मिट जाती है थकान, आंखें बंद करूं तो शब्द अंगड़ाइयां लेते, लेखनी हाथ लेकर उसे हम कागज पर उकेर देते , हृदय की अनंत कामनाओं से बंधी ये डोर , जो करते है शब्दों से अपनी भावनाओं का शोर ।।।। प्रतिभा दिनेश कर
0

कलमकार

नाम

टिप्पणियाँ