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काव्य कुंज

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विधा तारीख

इंसान होने की शर्त

केवल साँसें चलने से ही, जीवन होता पूर्ण नहीं , जिस मन में करुणा न बसे, वह होता इंसान नहीं औरों की पीड़ा देखकर, जो थोड़ा न पिघले वह तो केवल पत्थर है, उसमें कोई प्राण नहीं । सुख के ऊँचे शिखरों पर, अभिमान नहीं अच्छा, दुखियों की बेबसी पर, मूँदे रखना आँख नहीं अच्छा। धन-दौलत की तराजू में, इंसानियत न तौली जाती, पत्थर बन इस दुनिया में, पाना सम्मान नहीं अच्छा। यदि औरों का दुख-दर्द तुम्हें, तनिक नहीं रुलाता है, किसी गरीब का रोना भी, गर तुम्हें नहीं तड़पाता है। तो मत करना दावा जग में, कि तुम कोई इंसान हो, दया-धरम से शून्य हो तुम, बस पत्थर के समान हो। जो औरों के अंधियारे में, आशा की ज्योति जलाए, सच्चे अर्थों में धरती पर, बस वही मनुष्य कहलाए।

कलमकार

खिरसिन्धु साहू

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