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काव्य कुंज

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विधा तारीख

तुम पर ही फ़िदा हूँ

तुम पर ही फ़िदा हूँ मैं तुम्हें चाहता हूँ, तुम पर ही मर मिटा हूँ। प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।। धड़कनें कह रही हैं, कुछ सुनो तो ज़रा। पास आओ ना तुम, दूर क्यों हो भला? मन की बातें बता दूँ, वर्षों के बाद मिला हूँ। प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।। पास-पास हम हैं, मिलन की घड़ी आई है। रंग-बिरंगे बाग दिखे, रुत ने ली अंगड़ाई है।। खुशबू बिखेर दो ना, कुसुम बन खिला हूँ। प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।। तुम गीत बन जाओ, मैं संगीत बन जाऊँ। तुम हो हमजोली, मैं कविमीत बन जाऊँ।। लिख कर कविता, कल्पनाओं से घिरा हूँ। प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।। जीत की राहें, फैलाती हैं बाँहें, आ भी जा। खुशी के पल, ना जाए ढल, मान भी जा।। तुम हो बसंत बहार, मैं बदलती फ़िज़ा हूँ। प्यार करता हूँ तुझे, तुम पर ही फ़िदा हूँ।। कवि- अशोक कुमार यादव मुंगेली, छत्तीसगढ़

कलमकार

अशोक कुमार यादव

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