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काव्य कुंज

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विधा तारीख

ईश्वर की माया

निज पुत्र का वध करने रचाया था विधान होलिका ने वरदान का किया था अपमान बालक प्रह्लाद ने किया हरि का ध्यान, सत्य के आगे टिक न सका अभिमान। जो थी अग्नि से अजेय, वह जल गई, ईश्वर की माया से राख बन बिखर गई। अधर्म की चालें अधिक दिन न चलतीं, सत्य की ज्वाला हर पापी को निगलती। यही है संदेश, जो युगों से रहे, धर्म के पथ पर जो बढ़े, वे सदा अमर रहे।

कलमकार

खिरसिन्धु साहू

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