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विधा
तारीख
ईश्वर की माया
रचनाकार की आवाज में:
निज पुत्र का वध करने रचाया था विधान
होलिका ने वरदान का किया था अपमान
बालक प्रह्लाद ने किया हरि का ध्यान,
सत्य के आगे टिक न सका अभिमान।
जो थी अग्नि से अजेय, वह जल गई,
ईश्वर की माया से राख बन बिखर गई।
अधर्म की चालें अधिक दिन न चलतीं,
सत्य की ज्वाला हर पापी को निगलती।
यही है संदेश, जो युगों से रहे,
धर्म के पथ पर जो बढ़े, वे सदा अमर रहे।
कलमकार