रचना की खोज जारी है...
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शिक्षा के छह सोपान: 6 Cs
रचनाकार की आवाज में:
ज्ञान की इस बहती धारा में, बस रटना ही आधार नहीं,
सच्चा सीखना वह है, जिसमें केवल शब्दों का अंबार नहीं।
चलो सजाएं जीवन को, इन छह अनमोल सितारों से,
जो राह दिखाएंगे हमको, मुश्किल भरे किनारों से।
पहला है 'क्रिटिकल थिंकिंग', सत्य को परखना हम सीखें,
सवाल पूछना, तर्क खोजना, भ्रम को हरना हम सीखें ।
दुनिया की हर एक सूचना को, यूँ ही न स्वीकार करें,
बुद्धि की तीक्ष्ण कसौटी पर, हर तथ्य का विस्तार करें।
दूसरा 'कोलैबोरेशन' है, मिलकर कदम बढ़ाना है,
अकेले चलना जीत नहीं, सबको साथ निभाना है।
एक और एक ग्यारह होते, यह शक्ति पहचानें हम,
साझा लक्ष्य की खातिर ही, अपनी जिद को त्यागें हम।
तीसरा 'कम्युनिकेशन' है, मन की बात सुनाने को,
सरल, स्पष्ट और मधुर शब्द, दुनिया तक पहुँचाने को।
सुनना भी एक कला बड़ी है, सिर्फ बोलना काम नहीं,
भावों के इस आदान-प्रदान का, होता कहीं विराम नहीं।
चौथा है 'क्रिएटिविटी', जो नूतन राह बनाती है,
कल्पनाओं के पंख लगाकर, अंबर तक ले जाती है।
लीक छोड़कर चलना ही, अक्सर बदलाव लाता है,
रचनात्मक जो होता मन, वह जग में पूजा जाता है।
पाँचवाँ 'कैरेक्टर' अपना, नैतिकता की शान बने,
सत्य, दया और ईमानदारी, अपनी ही पहचान बने।
डिग्रियाँ तो मिल जाएंगी, पर संस्कार ही पूँजी है,
भीतर का जो चरित्र है, वही सफलता की कुंजी है।
छठा और अंतिम 'सिटीजनशिप', दायित्वों का बोध रहे,
धरती और समाज के प्रति, मन में सदा शोध रहे।
बनें सजग नागरिक ऐसे, कि अमर हमारा किस्सा रहे।
ये छह सूत्र अगर मिल जाएं, तो जीवन महक उठेगा,
सीखने का हर एक लम्हा, फिर खुशियों से चहक उठेगा।
कलमकार