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काव्य कुंज

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विधा तारीख

त्याग - सफलता का मूल्य

सफलता कोई उपहार नहीं, यह सौगात नहीं तकदीरों की, यह पसीने की हर बूंद में ढली, कहानी है संघर्षी वीरों की। यह उन रातों का उजियारा है, जो नींद से रिश्ता तोड़ गईं, यह उन कदमों की आहट है, जो थककर भी आगे दौड़ गईं। जो आज सुखों का त्याग करें, जो आराम से मुँह मोड़ें हैं, जो जलते सूरज में तपकर भी अपने सपनों को जोड़ें हैं— वही कल इतिहास रचेंगे, वही युग के नायक बनेंगे, जिनकी गूंजेगी हर चौखट पर, जिनके गीत समय भी गुनगुनाएंगे। यह राह नहीं फूलों वाली, यह काँटों से भरी डगर है, हर मोड़ पे परीक्षा खड़ी, हर कदम पे नया सफर है। पर जो डरकर रुक जाते हैं, वे भीड़ में खो जाते हैं, जो गिरकर फिर उठ खड़े हों— बस वही सितारे बन जाते हैं। त्याग की आग में जलकर ही सोना कुंदन बनता है, हर कठिनाई की चट्टान को साहस ही तो चीरता है। सफलता कोई उपहार नहीं, यह बलिदानों का फल है, जो आज खुद को जीत सके— कल पूरा उसका ही कल है।

कलमकार

खिरसिन्धु साहू

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