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जीवन निरंतर गीत है
रचनाकार की आवाज में:
जीवन निरंतर एक गीत है, हम दिल से गाते हैं,
जीवन की इस धारा को, सुर में सजाते हैं…॥,,,,,,,
जीवन एक निर्झर गीत है ,बहता जाए चुपचाप,
पत्थरों से टकराकर भी, रखता अपना आप।।
जब नन्हे थे हम सब, ना चिंता ना कोई भार,
माँ की गोद में मिलता था, सारा जगत का प्यार…
खेल-खेल में बीते दिन, सपनों की थी बारात,
मासूम सी मुस्कान में, छुपा था सारा प्यार।
फिर आई जवानी, जिम्मेदारियों का साज़,
सपनों को सजाने लगे, लेकर नए अंदाज़ ll
संग किसी के चल पड़े, जीवन की उस राह,
सुख-दुख के संग जीना, बन गई है अपनी चाह।
कभी धूप तो कभी छाँव, राहों में आते हैं,
गिरकर फिर संभलते हैं, आगे बढ़ जाते हैं।।
हर मोड़ पर मिलते हैं ,दुख के गहरे साए,
फिर भी उम्मीदों के दीप ,हम खुद ही जलाए।
संघर्ष की इस आग में, खुद को तपाते हैं।
धीरे-धीरे ढलता है, जीवन का ये प्रकाश,
यादों की छाया में, मिलता सुकून खास।
झुर्रियों में छुपी होती, अनुभव की हर बात,
बीते हुए कल की, सुनाते हैं हम सौगात।
ये बात सभी को हम दिल से समजाते है।
अंत में ये जीवन भी, सागर से मिल जाते हैं,
जन्मों की इस डोरी को, प्रेम से निभाते हैं।
जीवन एक भजन है, जिसे हम गाते हैं…॥
प्रतिभा दिनेश कर विकासखण्ड सरायपाली
कलमकार