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जिंदगी का सफर
रचनाकार की आवाज में:
ज़िंदगी में ऐसा कोई, नहीं आख़िरी मुकाम ,
जहाँ जा कर मिल सके, हमेशा के लिए आराम ।
हम सोचते हैं मंज़िलें, सब मुश्किलें कर देंगी कम,
पर हर जीत के बाद, शुरू होता कोई नया कदम।
एक सपना सच हुआ तो, दूसरा जग जाता है,
हर कामयाबी से हमारा, एक नया नाता है।
जैसे ही हम एक ऊँचाई, को जा कर छू लेते हैं,
सामने खड़े नए पहाड़, नई परीक्षा लेते हैं।
फूल अगर मिलते हैं तो, काँटों का भी साथ है,
हर नई उपलब्धि में, छुपी हुई कोई बात है-
मंज़िलें तो सिर्फ एक, छोटा सा पड़ाव हैं,
ये जीवन तो बस एक, निरंतर सा बहाव है।
कामयाबी के साथ ही, नई ज़िम्मेदारी आती है,
पुरानी मेहनत नए सफ़र की, सीढ़ी बन जाती है।
अगर कोई ये सोच कर रुके, कि सफर पूरा हुआ,
समझो उसने ज़िंदगी का, असली मतलब ना छुआ।
इसलिए इस सफर में, थक कर कभी रुकना नहीं,
नई मुश्किलों के आगे, हार कर झुकना नहीं।
चलते रहना ही यहाँ, ज़िंदगी की रीत है,
सफ़र से प्यार करना, असल तुम्हारी जीत है।
कलमकार