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निःशब्द प्रेम
रचनाकार की आवाज में:
निशब्द प्रेम की परिभाषा
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ह्रदयस्थल में जागृत,
प्रेम की बयार हो तुम ।
नग्न चक्षु से दृश्यपटल पर,
अनुभूति की बहार हो तुम।
जो भिगा दे मन को ,
वह वर्षा की फुहार हो तुम ।
जीवन में अमृत भर दे,
वह पीयूष की धार हो तुम ।
सख्त हृदय को को पिघला दे ,
अग्नि की वह धार हो तुम।
बिन कुछ कहे सबकुछ कह दे ,
ऐसे शब्दों की कटार हो तुम।
मिष्ठी वाणी से रस घोले ,
ऐसा है तुम्हारा प्रेम रसदार।
खुशियों से जीवन को भर दे,
मेरे जीवन का आधार।।।।
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली
कलमकार