रचना की खोज जारी है...
विधा
तारीख
मैं हूं तो शिकायत है
रचनाकार की आवाज में:
मैं हूं तो शिकायत है,
लड़ाई है, झगड़ा है,
मेरी हर बात पर तुम्हारा यूँ रूठ जाना भी बड़ा प्यारा है।
कभी सोचा है…
अगर मैं ना रहूं,
तो तुम्हारी नाराज़गी को कौन मनाएगा,
तुम्हारी खामोशी को कौन समझ पाएगा।
जो हर छोटी बात पर तुमसे बहस करता है,
असल में वही तुम्हारी सबसे ज्यादा फिक्र करता है।
तुम्हारे गुस्से के पीछे छुपी तकलीफ़ पढ़ लेता है,
तुम्हारी अधूरी बातों को भी महसूस कर लेता है।
कल को अगर मैं दूर चला गया,
तो ये झगड़े भी अधूरे रह जाएंगे,
तुम्हारे “सुनो ना” कहने पर
कोई अपना शायद ना आएगा।
फिर शायद तुम्हें एहसास होगा,
कि लड़ाईयाँ वहीं होती हैं
जहाँ रिश्ता दिल से निभाया जाता है,
वरना कौन किसी के लिए
अपना वक्त और जज़्बात गंवाया करता है।
इसलिए जब तक मैं हूं,
मेरी बातों में थोड़ा प्यार ढूंढ लेना,
क्योंकि जो हर हाल में तुम्हारे साथ खड़ा रहे,
उसे कभी यूँ नाराज़ होकर मत खो देना।
कलमकार